Kerala Lottery Result Today

Kerala Lottery Result Today
Sthree Sakthi (SS-84) Lottery Result on 12-12-2017

The First Kerala Lottery drawn in 1968.




Many of you have read about the origin of Kerala State Lottery Department and the Kerala lottery draws. It was the time of the second (1967-1969) E.M.S Namboothiripadu government. Sri.P. K. Kunju Sahib was handling the Finance  in his ministry. The government planed to begin a department to conduct lotteries governed by state government itself. There were some private lotteries running in the state and many complaints were raising about them. The government banned all the private lotteries. The intention behind forming an organaisation under the government itself was (1) prevent uncontrolled gambling initiated by private lottery conductors and create a reasonable platform to allow luck seekers to involve. (2) Provide some less laborious job opportunities for the public especially physically challenged and week people who can't do any hard work to find a living. (3). Find some non tax revenue for the government's development and philanthropic ventures. It was the first ever lottery initiative by a state government in all over India. Many state governments started this model of lottery draws after this.

The first Kerala Lottery Conducted on 26.01.1968
The first Kerala Lottery draw conducted on 26.01.1968
The first lottery sale was inaugurated on 01-Nov-1967 (the formation day of Kerala State). The sale closing date was 10 Jan 1968 and the draw was conducted on 26 Jan 1968 (the Republic day of India). The MRP of the ticket was Rs.1 and the first prize offered was Rs.50,000/-. There were only five digits in the numbers involved. The draw offered just 93 cash prizes in total. After this draw Kerala lottery department never went down till now.

Now the department is conducting 7 weekly lotteries in a week and 6 bumper lotteries in an year. As the the Director of State Lotteries stated in the event conducted for the draw of "Thiruvonam Bumper-2017", "Kerala lottery department is now providing the second highest revenue to the state government. In the financial year of 2016-17, Kerala lotteries have accomplished a total sale of Rs.7,394 Crore". Hundreds of government officials, thousands of agents and lakhs of re-sellers are depending on Kerala lotteries for a living.





आपने केरल राज्य लॉटरी विभाग और केरल लॉटरी ड्रॉ की उत्पत्ति  के बारे में पढ़ा होगा। दूसरा (1967-1969) ई.एम. एस. नम्बरुत्रीपडु सरकार का समय था। Sri.P. K कुंजु साहिब वित्त मंत्रालय संभाल रहे थे। सरकार ने सरकार द्वारा संचालित लॉटरियों का संचालन करने के लिए एक विभाग शुरू करने की योजना बनाई। राज्य में कुछ निजी लॉटरी चल रही थी और कई शिकायत उनके बारे में बढ़ रही थी। सरकार ने सभी निजी लॉटरी पर प्रतिबंध लगा दिया।  सरकार के तहत एक संगठन बनाने के पीछे का इरादा था (1) निजी लॉटरी द्वारा शुरू की गई अनियंत्रित जुआ को रोकने और भाग्य चाहने वालों को शामिल करने के लिए एक उचित मंच बनाना। (2) लोगों के लिए विशेष रूप से शारीरिक रूप से विकलांग के लोगों के लिए कुछ कम श्रमसाध्य रोज़गार अवसर प्रदान करें, जो किसी जीविका को खोजने के लिए कड़ी मेहनत नहीं कर सकते। (3)। सरकार के विकास और परोपकारी उद्यमों के लिए कुछ गैर कर राजस्व खोजें। यह पूरे भारत में राज्य सरकार द्वारा पहली लॉटरी थी।  इसके बाद कई राज्य सरकारों ने लॉटरी के इस मॉडल को शुरू किया।

पहली लॉटरी बिक्री का उद्घाटन 01 नवंबर 1967 (केरल राज्य का गठन दिवस) पर हुआ। बिक्री की समाप्ति तिथि 10 जनवरी 1968 थी और इसका ड्रा 26 जनवरी 1968 (भारत के गणतंत्र दिवस) पर आयोजित किया गया था। टिकट का दाम 1 रुपए था और प्रथम पुरस्कार 50,000/- रुपये थी। शामिल संख्या में केवल पांच अंकों थे। यह ड्रा कुल मिलाकर सिर्फ 93 कैश पुरस्कार प्रदान करता था। इसके बाद केरल लॉटरी विभाग ने अब तक नीचे नहीं चला गया।

अब केरला लाटरी विभाग एक सप्ताह में 7 लॉटरी का संचालन कर रहा है और एक वर्ष में 6 बम्पर लॉटरी का आयोजन कर रहा है। "थिरुवोनम बम्पर-2 017" के ड्रॉ के लिए आयोजित कार्यक्रम में राज्य लॉटरी के निदेशक के शब्द में, "केरल लॉटरी विभाग अब राज्य सरकार को दूसरा सबसे ज्यादा राजस्व प्रदान कर रहा है। 2016-17 के वित्तीय वर्ष में, केरल लॉटरी ने कुल 7,394 करोड़ रुपये की बिक्री पूरी की है "। सैकड़ों सरकारी अधिकारी, हजारों एजेंट और लाखों पुनर्विक्रेताएं का जीवित केरल लॉटरी पर निर्भर हैं।